आपका बंटी मन्नू भंडारी द्वारा रचित प्रसिद्ध बाल मनोवैज्ञानिक उपन्यास है। ये 16 भागों मे विभाजित है। इसका प्रकाशन 1971 में हुआ। उपन्यास का प्रारंभ शकुन व बंटी के भावात्मक वर्णन के साथ प्रारंभ होता है और उपन्यास का अंत बंटी को हॉस्टल मे छोड़े जाने के साथ होता।
उपन्यास के प्रमुख पात्र
ये कथन वकील चाचा ने बंटी को कहा था, जब वकील चाचा कोलकाता से बंटी के घर दिल्ली आए थे।
कुन्नी शर्मा साहब की लड़की थी।
शनिवार को बंटी की ममी लंच के बाद कॉलेज नहीं जाती है।
बंटी ने अपने घर मे बगीचे मे मोगरा को पानी देता था और उस पर अपना अधिकार रखता था। बिना पूछे उसकी ममी भी फूल नहीं तोड़ सकती थी।
टीटू ने बंटी को कहाँ , बुद्धू कहीं का ममी पापा की लड़ाई होती है न , उसे तलाक कहते है।
मन्नू भण्डारी द्वारा बाल मनोवैज्ञानिक उपन्यास आपका बंटी 1970 में लिखा गया एवं 1971 मे धर्मयुग नामक पत्रिका मे धारावाहिक के रूप मे प्रकाशन हुआ।
टीटू अपनी बहन शन्नो के साथ कैरम खेल खेल रहा था।
जब फूफी आंगन में झाड़ू लगा रही थी तब बंटी ने अपने पापा द्वारा भेजी हुई बंदूक ( खिलोने) को फूफी के पीठ पर बंदूक की नली रखकर ऐसा कहा था।
सोने से पहले बंटी को उसकी ममी शकुन सुनाती थी।
फूफी शकुन के घर खाना वगैरा बनाती थी व शकुन के कॉलेज जाने के पश्चात बंटी का ध्यान रखती थी।