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Rpsc 1st Grade Hindi Padya Khand

Rpsc 1st Grade Hindi Padya Khand

Rpsc 1st Grade Hindi Padya Khand इस बार स्कूल व्याख्याता हिन्दी विषय मे पाठ्यक्रम मे परिवर्तन किया गया है। नवीन पाठ्यक्रम के अनुसार हम आपके लिए लेकर आए है MCQ जो पिछली परीक्षाओ मे आए हुए व नए प्रश्नों के रूप मे। आप इसके माध्यम से प्रश्नों का अभ्यास कर सकते है। जिससे अपनी तैयारी को और मजबूत कर सकते है। 

Rpsc 1st Grade Hindi Padya Khand मे कबीर - ग्रंथावली , नागमती वियोग खंड , बालकांड , भ्रमरगीत - सार , बिहारी - रत्नाकर, घनानन्द - कवित्त, साकेत व राम की शक्ति पूजा पाठ्यक्रम मे शामिल की गई है। इस बार राम की शक्ति पूजा , नागमती वियोग खंड और घनानन्द - कवित्त को शामिल किया गया।

कबीर ग्रंथावली  

कबीर ग्रंथावली के संपादक श्याम सुंदरदास है। 

सिकंदर लोदी के समकालीन कबीर दास का जन्म 1398 ई. मे हुआ था। 

कबीर दास की रचनाएं - साखी , शब्द , रमैनी है। इन तीनों का संग्रह बीजक कहलाता है। 

बीजक का सम्पादन कबीर दास के शिष्य धर्मदास ने किया। 

नागमती वियोग - खंड 

जायसी कृत ' पद्मावत ' में कुल 57 खंड है। 

पद्मावत का नागमती वियोग खंड हिन्दी साहित्य की अनुपम निधि है। 

पद्मावत की रचना मलिक मोहम्मद जायसी ने की थी । इसका प्रिय अलंकार उत्प्रेक्षा है। 

मलिक मोहम्मद जायसी शेरशाह सूरी के समकालीन थे। 

पद्मावत मे सात चौपाई के बाद एक दोहा रखने की परंपरा थी। 

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने जायसी द्वारा रचित तीन ग्रंथों का उल्लेख किया - पद्मावत , अखरावट व आखिरी कलाम 

पद्मावत मे प्रयुक्त प्रतिकार्थ - 

रत्नसेन - आत्मा या मन 

पद्मावती - परमात्मा का 

नागमती - सांसारिक बुद्धि का 

सिंहल - हृदय का 

राघव चेतन - शैतान का 

अलाउद्दीन - माया का 

बालकाण्ड 

रामचारित मानस की रचना तुलसीदास ने की । 

रामचारित मानस मे सात कांड है क्रमश इस प्रकार है -

  1. बाल कांड 2. अयोध्या कांड 3. अरण्य कांड 4. किष्किन्धा कांड 5. सुंदर कांड 6. लंका कांड 7. उत्तरकाण्ड

भ्रमरगीत सार 

भ्रमरगीत सार के संपादक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने किया। 

भ्रमर गीत सार मे आचार्य शुक्ल द्वारा 400 पद संपादित किए। 


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बिहारी - रत्नाकर 

बिहारी रत्नाकर जगन्नाथ दास रत्नाकर द्वारा किया गया। 

बिहारी सतसई की रचना बिहारी द्वारा 1662 ई. में की। 

निम्बार्क संप्रदाय से दीक्षित बिहारी के गुरु नरहरी दास माने जाते है। 

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने बिहारी सतसई मे 700 दोहे बताए। 

डॉ. नगेन्द्र ने 713 दोहें व 6 सोरठे बताए । 

बिहारी रत्नाकर के संपादक जगन्नाथ दास रत्नाकर ने 713 दोहे बताए। 

घनानन्द - कवित्त 

घनानन्द - कवित्त के संपादक विश्वनाथ प्रसाद मिश्र है। 

घनानन्द कवित्त मे 288 सवैये व 214 कवित्त है। 

साकेत 

साकेत की रचना मैथिलीशरण गुप्त ने की। 

मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 चिरगाँव झाँसी में व निधन 11 सितंबर 1964 को झाँसी में हुआ। 

मैथिलीशरण गुप्त के गुरु महावीर प्रसाद द्विवेदी थे। 

राम की शक्ति पूजा 

राम की शक्ति पूजा सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने की। 

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का एकमात्र खंडकाव्य तुलसीदास है।